नववर्ष में मेरे इस नये ब्लॉग पर आप सभी पाठकों का स्वागत है, इस ब्लॉग पर आप श्रीमती लीलावती जी (मेरी अम्माजी) की अनेक रचनाओं का रस्सावादन ले सकतें हैं, आपके सहयोग और स्नेह के बिना ये संभव नहीं होगा आप सबका इस ब्लॉग पर इंतज़ार रहेगा, आज मैं अम्माजी की एक गज़ल आप सबके लिए प्रस्तुत करती हूँ...
तीरगी छाई हुई है, हर डगर खामोश है
आदमी सहमा हुआ है और नगर खामोश है।
गुफ़्तगू करने का उसको शौंक़ था हर एक से
बात कुछ तो है यक़ीनन, वो अगर ख़ामोश है।
जोश कुछ दिल में नही है, सर्द-सा माहौल है
हम इधर ख़ामोश हैं और वो उधर ख़ामोश है।
ऐ मेरे मौला !मुझे अब रास्ता तू ही बता
पड़ गई हूँ मैं अकेली हमसफ़र ख़ामोश है।
मेरे अपने भी तो मुझसे बात कुछ करते नहीं
घर में सन्नाटा है और हर इक बशर ख़ामोश है।
तीरगी छाई हुई है, हर डगर खामोश है
आदमी सहमा हुआ है और नगर खामोश है।
गुफ़्तगू करने का उसको शौंक़ था हर एक से
बात कुछ तो है यक़ीनन, वो अगर ख़ामोश है।
जोश कुछ दिल में नही है, सर्द-सा माहौल है
हम इधर ख़ामोश हैं और वो उधर ख़ामोश है।
ऐ मेरे मौला !मुझे अब रास्ता तू ही बता
पड़ गई हूँ मैं अकेली हमसफ़र ख़ामोश है।
मेरे अपने भी तो मुझसे बात कुछ करते नहीं
घर में सन्नाटा है और हर इक बशर ख़ामोश है।
लेखिका- लीलावती बंसल
प्रस्तुतकर्ता- भावना कुँअर
प्रस्तुतकर्ता- भावना कुँअर
तीरगी-अंधकार, बशर-आदमी, ग़ुफ़्तगू-बात, हमसफ़र-सहयात्री, माहौल-परिवेश,
िदल को छू जाने वाली गजल है ।
ReplyDeleteआपको नववषॆ की बधाई । नया आपकी लेखनी में एेसी ऊजाॆ का संचार करे िजसके प्रकाश से संपूणॆ संसार आलोिकत हो जाए ।
मैने अपने ब्लाग पर एक लेख िलखा है-आत्मिवश्वास के सहारे जीतें िजंदगी की जंग-समय हो तो पढें और कमेंट भी दें-
http://www.ashokvichar.blogspot.com
गुफ़्तगू करने का उसको शौंक़ था हर एक से
ReplyDeleteबात कुछ तो है यक़ीनन, वो अगर ख़ामोश है।
really nice !!!
भावनाजी आपको भी नववर्ष की हार्दिक सुभकामनाये.
ReplyDeleteBhawana ji,
ReplyDeleteBahut hee khoobsurat gazal likhi hai Mata Jee ne.Aur use apne Ek akrshak nam vale blog par post kiya hai.Mataji ko meree taraf se hardik badhai evam shubhkamnayen deejiyega.Asha hai age bhee unkee gazalen padhvatee rahengee.
Hemant Kumar
wah....bhot khub....yun to her ek she'r umda hai pr ye jyada accha lga...
ReplyDeleteमेरे अपने भी तो मुझसे बात कुछ करते नहीं
घर में सन्नाटा है और हर इक बशर ख़ामोश है।
नववर्ष की हार्दिक सुभकामनाये.
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
ReplyDeleteआपकी इस ग़ज़ल पर भूतनाथ खामोश है
ReplyDeleteइस ग़ज़ल का हर लफ्ज़ गोया पुर-जोश है !!
मौजूदा-ऐ-हालात को बयां करती
ReplyDeleteएक उम्दा ग़ज़ल !
नया साल सुख, शान्ति और सम्रद्धि लाये !
आपके सभी रचनात्मक कार्य पूरे हों !
मेरी शुभकामनाएं !
'तीरगी छाई हुई है, हर डगर खामोश है
ReplyDeleteआदमी सहमा हुआ है और नगर खामोश है।'
Respected Bhawana ji,
ReplyDeleteMata ji kee gajal ka har sher kafee kuchh kah raha hai.itnee sundar rachana ke liye unhen meree badhai.
Poonam
Bahut khub.
ReplyDeleteक्या बात है लीला जी...........ये तो किसी बहुत गहरे शाईर के हर्फ़ हैं.....आपने कमाल का रच डाला....!!
ReplyDeletebahot khoob
ReplyDeleteबहुत सुंदर प्रस्तुति
ReplyDeletethank u so much.
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