बहुत दिनों से अम्माजी की रचनाओं की लगातार माँग पर भी मैं पाठकों को रचनाएँ नहीं दे पाई उसके लिए क्षमा चाहती हूँ, अब मेरी किताबें युगांडा से मेरे पास आ गई हैं अब आप लोगों को शिकायत का मौका नहीं दूँगी, पेश है ये गज़ल इस आशा से कि पंसद आएगी ...
दामन नहीं छुड़ाएँगे इस ज़िदगी से हम
रिश्ते सभी निभाएँगे इस ज़िंदगी से हम।
बख्शी हैं कितनी नेमतें परवरदिगार ने
भरपूर हज़ उठाएँगे इस ज़िंदगी से हम।
जो लोग भूल बैठे हैं मतलब हयात का
उन सबको ही मिलाएँगे इस ज़िंदगी से हम।
मफ़हूम ज़िंदगी का समझ लेंगे जिस घड़ी
खिलवाड़ कर ना पाएँगे इस ज़िंदगी से हम।
मुहकम यक़ीन और - अमल के बिन
कैसे नज़र मिलाएँगे इस ज़िंदगी से हम।
बख्शी- प्रदत्त, मुहकम- अटल, नेंमते- वरदान, मुसल्सल- निरन्तर, अमल- कार्यन्वयन, हज़-सुख, मफ़हूम-सन्दर्भ, हयात-ज़ीवन
Monday, September 6, 2010
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बख्शी हैं कितनी नेमतें परवरदिगार ने
ReplyDeleteभरपूर हज़ उठाएँगे इस ज़िंदगी से हम।
शेर अच्छा लगा बहुत बहुत बधाई
बहुत उम्दा सोच प्रस्तुत करती रचना।
ReplyDeleteहिन्दी का प्रचार राष्ट्रीयता का प्रचार है।
हिंदी और अर्थव्यवस्था, राजभाषा हिन्दी पर, पधारें
सुन्दर प्रस्तुति
ReplyDeleteयहाँ भी पधारें:-
ईदगाह कहानी समीक्षा
behad sunder.
ReplyDeleteदामन नहीं छुड़ाएँगे इस ज़िदगी से हम
ReplyDeleteरिश्ते सभी निभाएँगे इस ज़िंदगी से हम ..
बहुत ही लाजवाब ग़ज़ल है ... सच है की रिश्तों को निभाना चाहिए ...
सराहनीय लेखन........
ReplyDelete+++++++++++++++++++
चिठ्ठाकारी के लिए, मुझे आप पर गर्व।
मंगलमय हो आपके, हेतु ज्योति का पर्व॥
सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी
Aapke blo par pahali bar aaya hun. Phir aunga.Plz. visit my blog.
ReplyDeleteBahut hi umda ghazal Thanks.
ReplyDeleteBahut hi umda post.Thanks.
ReplyDeleteआपके जीवन में बारबार खुशियों का भानु उदय हो ।
ReplyDeleteनववर्ष 2011 बन्धुवर, ऐसा मंगलमय हो ।
very very happy NEW YEAR 2011
आपको नववर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें |
satguru-satykikhoj.blogspot.com
Dil ko chu gayi rachna
ReplyDeletehttp://amrendra-shukla.blogspot.com/
सबसे पहले तो 90 साल वाली दादी माँ को मेरा सादर नमन.
ReplyDeleteउनकी यह पंक्तियाँ यद् रहेंगी.
मफ़हूम ज़िंदगी का समझ लेंगे जिस घड़ी
खिलवाड़ कर ना पाएँगे इस ज़िंदगी से हम।
आपको एवं आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनायें!
ReplyDeleteसुन्दर प्रस्तुति|
ReplyDeleteहोली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ|
कुछ लोग जीते जी इतिहास रच जाते हैं
ReplyDeleteकुछ लोग मर कर इतिहास बनाते हैं
और कुछ लोग जीते जी मार दिये जाते हैं
फिर इतिहास खुद उनसे बनता हैं
आशा है की आगे भी मुझे असे ही नई पोस्ट पढने को मिलेंगी
आपका ब्लॉग पसंद आया...इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी
कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
बहुत मार्मिक रचना..बहुत सुन्दर...होली की हार्दिक शुभकामनायें!
बहुत खूबसूरत गज़ल
ReplyDeleteबहुत खूबसूरत गज़ल ...यहाँ आना अच्छा लगा
ReplyDeleteजो लोग भूल बैठे हैं मतलब हयात का
ReplyDeleteउन सबको ही मिलाएँगे इस ज़िंदगी से हम।
vada kijiye ab kahi n jayenge ...
Bahut umda rachana..
ReplyDeleteजो लोग भूल बैठे हैं मतलब हयात का
उन सबको ही मिलाएँगे इस ज़िंदगी से हम।
Mujhe ek sher yaad aa raha hai...
SHAAKH SE TOOT KAR GIRNE KI SAZA DE MUJHKO,
EK PATTA HI TO HUN ,KYUN NA HAWA DE MUJHKO.
Videsh me rah kar bhi apni sanskriti ko nahi bhooli hain aap...aapko sadhuwad.
बेहतरीन प्रस्तुति...मन को भा गईं..शुभकामनायें.
ReplyDeletebhut hi khubsurat rachna hai apki....
ReplyDeleteबहुत सुंदर। आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आया। आना सार्थक हुआ। अब आना जाना बना रहेगा।
ReplyDeleteजो लोग भूल बैठे हैं मतलब हयात का
ReplyDeleteउन सबको ही मिलाएँगे इस ज़िंदगी से हम।
क्या बात है, बहुत सुंदर
Dadi maa ke charno me Pranam,
ReplyDeleteAb gazal ki bat .. to har ek sher sidha dil co chuu gaya.