मेरा वजूदे-ख़ास, ये तेरी वजह से है
मेरे लबों पे प्यास ये, तेरी वजह से है।
मेरे लबों पे प्यास ये, तेरी वजह से है।
हम तेरे पास आ गए अपने ज़नून में
मंज़िल जो आई पास, ये तेरी वजह से है।
ये इंतिशारे-ज़ेहन भी है तेरी ज़ात से
और दिल है जो उदास, ये तेरी वजह से है।
आने से घर में तेरे बहारों की भीड़ है
रौनक़ है आस-पास, ये तेरी वजह से है।
जीने की आरज़ू थी न हसरत ही थी कोई
जीने की दिल में आस, ये तेरी वजह से है।
लेखिका- लीलावती बंसल
प्रस्तुतकर्त्ता- भावना कुँअर
वजूदे-ख़ास-विशिष्ट व्यक्तित्व, आरज़ू-आकांक्षा, लबों-होठों, हसरत-शेष इच्छा, जुनून-पागलपन, इंतिशारे-ज़ह्न-मानसिक चिन्ता, ज़ात-व्यक्ति
ग़ज़ल बहुत पसंद आयी!
ReplyDeleteगुलाबी कोंपलें
चाँद, बादल और शाम
हम तेरे पास आ गए अपने ज़नून में
ReplyDeleteमंज़िल जो आई पास, ये तेरी वजह से है।beautiful..
ये इंतिशारे-ज़ेहन भी है तेरी ज़ात से
ReplyDeleteऔर दिल है जो उदास, ये तेरी वजह से है।
-बहुत गजब..वाह!! माता श्री को नमन.
जीने की आरज़ू थी न हसरत ही थी कोई
ReplyDeleteजीने की दिल में आस, ये तेरी वजह से है।
Bahut sundar panktiyan.
Bhawana ji,
mataji ko mere taraf se bahut dher saree shubhkamnayen.
Poonam
जीने की आरज़ू थी न हसरत ही थी कोई
ReplyDeleteजीने की दिल में आस, ये तेरी वजह से है।
शानदार गजल। बधाई
अम्मा जी को मेरा नमस्कार पहुँचे और बुजुर्गों से मेरा ये कहना है कि
ReplyDeleteलब पे अभी भी आस,ये तेरी वजह से है
जीवन के हूँ मै पास ,ये तेरी वजह से है
'जीने की आरज़ू थी न हसरत ही थी कोई
ReplyDeleteजीने की दिल में आस, ये तेरी वजह से है।'
- किसी का सम्बल मिलने से जीवन की राह आसान हो जाती है.
अम्मा जी की लेखनी इसी तरह हमारे दिल के भावों को स्पर्श करती रहे।
ReplyDeleteहम तेरे पास आ गए अपने ज़नून में
ReplyDeleteमंज़िल जो आई पास, ये तेरी वजह से है।
ये इंतिशारे-ज़ेहन भी है तेरी ज़ात से
और दिल है जो उदास, ये तेरी वजह से है।
wah wah
bahut khoob
bhawana ji, apka bahut bahut shukriya jo aap hum tak amma ji ki rachnaaye lekar aayi.
dhanyawad
manuj mehta
bahut khoobsurat gazal....sabdo me bayan karna muskil.
ReplyDeletevishestaya mejhe ye panktiyan bahut achhi lagi:
आने से घर में तेरे बहारों की भीड़ है
रौनक़ है आस-पास, ये तेरी वजह से है।
जीने की आरज़ू थी न हसरत ही थी कोई
जीने की दिल में आस, ये तेरी वजह से है।
mai aapke gazal ka prashansak ban gaya hun.gazalen aisi ki gungunaane ko dil karta hai.
रचनाकार और प्रस्तुत करता धन्यवाद के पात्र / इंतिशारे-ज़ेहन शब्द का शब्दार्थ भी लिख दिया जाता तो उत्तम रहता
ReplyDeleteसभी पाठकों का बहुत-बहुत धन्यवाद...
ReplyDeleteइंतिशारे-ज़ह्न का अर्थ है-मानसिक चिन्ता
रचनाकार को नमन ओर प्रस्तुतकर्ता को धन्यवाद एक बेहतरीन गजल से रु ब रु करवाने के लिए
ReplyDeleteबहुत अच्छा प्रयास लगा
सभी पाठकों का अम्माजी की ओर से और मेरी ओर से हार्दिक धन्यवाद..
ReplyDeleteआने से घर में तेरे बहारों की भीड़ है
ReplyDeleteरौनक़ है आस-पास, ये तेरी वजह से है।
umang se bhari hai yeh rachna, ismein shokhi hai, nasha hai, pyar ki mahak hai