Friday, March 6, 2009

मुझसे नज़र बचा के अकेली गुज़र गई...


8
मुझसे नज़र बचा के अकेली गुज़र गई
कोई ज़रा बताए मुझे वो किधर गई।

महसूस कर रहा हूँ अब उसके फ़िराक़ में
जैसे कि रेल सीने से मेरे गुज़र गई।

जो भी सज़ाएँ देनी हों, वो दीजिए मुझे
सूरत हसीन आपकी, दिल में उतर गई।

अपने ही गाँव वाले मुझे जानते न थे
ये खुद की जुस्तज़ू, मुझे मशहूर कर गई।

हमने हसीन ख़्वाब तो देखे न थे कभी
किस की दुआ है आज जो क़िस्मत सँवर गई।

लेखिका- लीलावती बंसल
प्रस्तुतकर्त्ता- भावना कुँअर

जुस्तजू-तलाश, फ़िराक-चिन्ता, हसीन-सुन्दर

20 comments:

  1. महसूस कर रहा हूँ अब उसके फ़िराक़ में
    जैसे कि रेल सीने से मेरे गुज़र गई।

    अपने ही गाँव वाले मुझे जानते न थे
    ये खुद की जुस्तज़ू, मुझे मशहूर कर गई।

    हमने हसीन ख़्वाब तो देखे न थे कभी
    किस की दुआ है आज जो क़िस्मत सँवर गई।

    बहुत बेहतरीन शेर कहें हैं...वाह...पूरी ग़ज़ल ही पुर असर है...शुक्रिया इसे पाठकों तक पहुँचने के लिए.
    नीरज

    ReplyDelete
  2. आपकी कविता दिल को छू गई।

    ReplyDelete
  3. महसूस कर रहा हूँ अब उसके फ़िराक़ में
    जैसे कि रेल सीने से मेरे गुज़र गई।

    बहुत सुन्दर शुक्रिया इसको पढ़वाने का

    ReplyDelete
  4. वाह जी वाह कितना प्यारा लिखा है ...सचमुच

    मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  5. Ek Behtarin kavita se mulakat ho gai
    Kis ki dua hai Aaj Jo Kismat Sanwar Gai
    Hamne Haseen Khwab to Dekhe na the kabhi
    Itna behtar likha hai Aapne ki Dil me utar gayi


    GDSaklani

    ReplyDelete
  6. ग़ज़ल की बारीकियां काफिया रदीफ का चुस्त निर्वाह
    खास कर उर्दू की मश्हूर बहर
    मफऊल फाइलात मफाईल फाइलुन का हर शेर में निर्वाह.मुझे इस बहर ने रोक लिया.
    जो भी सज़ायें देनी हों,वो दीजिए मुझे.
    सूरत हसीन आपकी दिल में उतर गई.
    इस शेर के क्या कहने.अल्लाह करे ज़ोर कलम और ज़्यादा.

    ReplyDelete
  7. अपने ही गाँव वाले मुझे जानते न थे
    ये खुद की जुस्तज़ू, मुझे मशहूर कर गई...
    बढ़िया प्रस्तुति
    आपको भी होली पर्व की शुभकामना .

    ReplyDelete
  8. सादर ब्लॉगस्ते,
    कृपया पधारें व 'एक पत्र फिज़ा चाची के नाम'पर अपनी टिप्पणी के रूप में अपने विचार प्रस्तुत करें।

    आपकी प्रतीक्षा में...

    ReplyDelete
  9. सादर ब्लॉगस्ते,
    कृपया पधारें व 'एक पत्र फिज़ा चाची के नाम'पर अपनी टिप्पणी के रूप में अपने विचार प्रस्तुत करें।

    आपकी प्रतीक्षा में...

    ReplyDelete
  10. आपको भी होली की शुभकामना ...

    ReplyDelete
  11. आपके और आपके पुरे परिवार को होली की बधाई और शुभकामनायें.

    धन्यवाद

    ReplyDelete
  12. वाह ख़ूबसूरत रचना डॉ.साहब, होली की आपको हार्दिक शुभकामनाएं\

    ReplyDelete
  13. होली के पावन पर्व पर आपको एवं प्रियजनों को हार्दिक शुभकामनाएँ~

    ReplyDelete
  14. अपने ही गाँव वाले मुझे जानते न थे
    ये खुद की जुस्तज़ू, मुझे मशहूर कर गई।
    ... प्रभावशाली अभिव्यक्ति , सुन्दर गजल है !!!!

    ReplyDelete
  15. hi..it is nice thing to know that you are writing in your own mother tongue...it is really a great contribution to save and protect our own mother tongue... by the way which typing tool are you using for typing in Hindi...?

    Recently I was searching for the user friendly Indian Language typing tool and found.... " quillpad". do you use the same..?

    Heard that it is much more superior than the Google's indic transliteration....!? 'quillpad' provides rich text option as well as 9 Indian Languages too...

    try this one, www.quillpad.in

    For country like India, "English is not enough".

    So...Save,protect,popularize and communicate in our own mother tongue....it'll be a great experience...
    Jai...Ho..

    ReplyDelete
  16. lajawab........bahut badhiya sher hain......har sher ik kahani kehta hua.

    ReplyDelete
  17. सभी ग़ज़लें एक से बढ़कर एक हैं.. पहली बार ब्लॉग पर आया और मुरीद हो गया ....

    ReplyDelete
  18. bahut khoob...!

    हमने हसीन ख़्वाब तो देखे न थे कभी
    किस की दुआ है आज जो क़िस्मत सँवर गई।

    kya kahane

    ReplyDelete