Wednesday, April 15, 2009

इस तरह लोगों के गर तू काम आता जाएगा

13
इस तरह लोगों के गर तू काम आता जाएगा
सबके दिल में एक दिन तू राम बन छा जाएगा।

है तुझे उससे मुहब्बत इसमें शक कुछ भी नहीं
तू यक़ीं कर तू भी उसको एक दिन भा जाएगा।

जिस तरह मुमकिन हो हासिल कर उसे, खुश रख उसे
तू बड़ा हो जाएगा गर तू उसे पा जाएगा।

छल-कपट क्या चीज़ है चल जाएगा उसको पता
जब किसी से एक भी धोखा अगर खा जाएगा।

काम कर ऐसा, हिमालय-सा बने तेरा वजूद
तू बड़ा होगा तभी जब तू उसे पा जाएगा।

वजूद-अस्तित्व

लेखिका- लीलावती बंसल
प्रस्तुतकर्त्ता- भावना

20 comments:

  1. bahut hi badhiya ........prerna deti kavita.

    ReplyDelete
  2. काम कर ऐसा, हिमालय-सा बने तेरा वजूद
    तू बड़ा होगा तभी जब तू उसे पा जाएगा।

    बहुत प्रेणादायक रचना.

    रामराम.

    ReplyDelete
  3. भावना जी,बहुत सुन्दर रचना है। बधाई।
    बहुत सुन्दर भाव है-

    काम कर ऐसा हिमालय-सा बने तेरा वजूद
    तू बड़ा होगा तभी जब तू उसे पा जाएगा।

    ReplyDelete
  4. काम कर ऐसा, हिमालय-सा बने तेरा वजूद
    तू बड़ा होगा तभी जब तू उसे पा जाएगा।

    शानदार रचना .........लाजवाब ख्याल........

    ReplyDelete
  5. "काम कर ऐसा, हिमालय-सा बने तेरा वजूद
    तू बड़ा होगा तभी जब तू उसे पा जाएगा।"

    केवल इन पंक्तियों ने ही सारा का सारा प्रभाव डाल दिया । मुग्ध हूँ ।

    ReplyDelete
  6. sahi me kaam aisa hi krna chahiye...ki vajood himalya sa ho...

    ReplyDelete
  7. लीलावती बंसल की सुन्दर गजल
    प्रकाशित कर पढ़वाने के लिए,
    डा0 भावना जी को धन्यवाद।

    ReplyDelete
  8. ... प्रभावशाली व प्रसंशनीय अभिव्यक्ति ।

    ReplyDelete
  9. छल-कपट क्या चीज़ है चल जाएगा उसको पता
    जब किसी से एक भी धोखा अगर खा जाएगा।
    achchha laga. badhai.

    ReplyDelete
  10. है तुझे उससे मुहब्बत इसमें शक कुछ भी नहीं
    तू यक़ीं कर तू भी उसको एक दिन भा जाएगा।

    khoob...!

    ReplyDelete
  11. छल-कपट क्या चीज़ है चल जाएगा उसको पता
    जब किसी से एक भी धोखा अगर खा जाएगा।


    लाजवाब...वाह.
    नीरज

    ReplyDelete
  12. यहाँ आना हर बार एक पावन प्रक्रिया से गुज़रना
    ही होता है ....
    अच्छे विचारों से साक्षात्कार
    और माँ जी का आशीर्वाद ....

    बहुत बहुत अच्छी ग़ज़ल पढ़ कर मन संतुष्ट हुआ

    और ये माँ के क़दमों में . . . .

    "तुम स्वयं को जोड़ लो उससे समर्पण भाव से
    फिर कठिन राहों में भी जीना तुम्हे आ जाएगा.."

    ---मुफलिस---

    ReplyDelete
  13. बहुत उत्तम रचना है !

    ReplyDelete
  14. काम कर ऐसा, हिमालय-सा बने तेरा वजूद
    तू बड़ा होगा तभी जब तू उसे पा जाएगा।
    शुक्रिया भावना जी . उम्दा ,प्रेरणादायी ,सहज शब्दों की इस बेहतरीन रचना की प्रस्तुति के लिए . रचना शिल्पी अम्मा जी का आभार .

    ReplyDelete
  15. interesting blog, i will visit ur blog very often, hope u go for this website to increase visitor.Happy Blogging!!!

    ReplyDelete